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ramayan 1.14.7: तत्पश्चात् उन श्रेष्ठ ब्राह्मणों ने शास्त्रों का ध्यान रखते हुए मनस्वी राजा दशरथ का तीसरा सवनकर्म भी विधिपूर्वक सम्पन्न किया॥7॥   |   ramayan सर्ग 1.14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.14.7 
तृतीयसवनं चैव राज्ञोऽस्य सुमहात्मन:।
चक्रुस्ते शास्त्रतो दृष्ट्वा यथा ब्राह्मणपुंगवा:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उन श्रेष्ठ ब्राह्मणों ने शास्त्रों का ध्यान रखते हुए मनस्वी राजा दशरथ का तीसरा सवनकर्म भी विधिपूर्वक सम्पन्न किया॥7॥
 
After that, those great Brahmins, taking care of the scriptures, also duly performed the third Savanakarma of Manasvi King Dasharatha. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)