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ramayan 1.14.59: तब द्विजश्रेष्ठ ऋषि ने 'तथास्तु' कहकर राजा से कहा - 'राजन्! आपके चार पुत्र होंगे, जो इस कुल का भार वहन करने में समर्थ होंगे ॥59॥   |   ramayan सर्ग 1.14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  1.14.59 
तथेति च स राजानमुवाच द्विजसत्तम:।
भविष्यन्ति सुता राजंश्चत्वारस्ते कुलोद्वहा:॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
तब द्विजश्रेष्ठ ऋषि ने 'तथास्तु' कहकर राजा से कहा - 'राजन्! आपके चार पुत्र होंगे, जो इस कुल का भार वहन करने में समर्थ होंगे ॥59॥
 
Then Dwij's best sage said 'Tathaastu' and said to the king - 'King! You will have four sons, who will be able to bear the burden of this clan. 59॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)