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ततोऽब्रवीदृष्यशृंगं राजा दशरथस्तदा॥ ५८॥
कुलस्य वर्धनं तत् तु कर्तुमर्हसि सुव्रत।
अनुवाद
यज्ञ समाप्त होने के बाद राजा दशरथ ने ऋष्यश्रृंग से कहा, 'हे श्रेष्ठ व्रतों का पालन करने वाले महामुनि, अब आप वह कर्म करें जिससे मेरी कुल परम्परा आगे बढ़े।'
After the sacrifice was over, King Dasharath said to Rishyashringa, 'O great sage who has observed the best vows, now you must perform the deed that will carry forward my family tradition.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥