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ramayan 1.14.53-54h: इसके बाद राजा दशरथ ने एकाग्रचित्त होकर आगन्तुक ब्राह्मणों को एक करोड़ जम्बूनाड स्वर्ण मुद्राएँ वितरित कीं।   |   ramayan सर्ग 1.14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान  »  श्लोक 53-54h
 
 
श्लोक  1.14.53-54h 
तत: प्रसर्पकेभ्यस्तु हिरण्यं सुसमाहित:॥ ५३॥
जाम्बूनदं कोटिसंख्यं ब्राह्मणेभ्यो ददौ तदा।
 
 
अनुवाद
इसके बाद राजा दशरथ ने एकाग्रचित्त होकर आगन्तुक ब्राह्मणों को एक करोड़ जम्बूनाड स्वर्ण मुद्राएँ वितरित कीं।
 
After this, King Dasharath, with his mind focused, distributed one crore Jambunad gold coins to the visiting Brahmins. 53 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)