श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान  »  श्लोक 51-52h
 
 
श्लोक  1.14.51-52h 
ऋत्विजस्तु तत: सर्वे प्रददु: सहिता वसु॥ ५१॥
ऋष्यशृंगाय मुनये वसिष्ठाय च धीमते।
 
 
अनुवाद
फिर उन सभी ऋत्विजों ने मिलकर वह सारा धन बुद्धिमान ऋषि ऋष्यश्रृंग और बुद्धिमान वसिष्ठ को सौंप दिया ॥51 1/2॥
 
Then all those Ritvijas together handed over all that wealth to the wise sage Rishyashringa and the wise Vasistha. 51 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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