श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान  »  श्लोक 50-51h
 
 
श्लोक  1.14.50-51h 
एवमुक्तो नरपतिर्ब्राह्मणैर्वेदपारगै:।
गवां शतसहस्राणि दश तेभ्यो ददौ नृप:॥ ५०॥
दशकोटिं सुवर्णस्य रजतस्य चतुर्गुणम्।
 
 
अनुवाद
वेदज्ञ ब्राह्मणों से यह सुनकर राजा ने उन्हें दस लाख गायें दीं, साथ ही दस करोड़ स्वर्ण मुद्राएँ और उससे चार गुनी चाँदी की मुद्राएँ भी भेंट कीं।
 
On hearing this from the Brahmins who were experts in the Vedas, the king gave them ten lakh cows. He also offered ten crore gold coins and four times that amount of silver coins.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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