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ramayan 1.14.5: तत्पश्चात् उन समस्त ऋषियों ने कर्मों के स्वरूप देवताओं का पूजन करके हर्ष में भरकर यथाविधि प्रातःकाल, मध्याह्न और तृतीय सूर्योदय आदि कर्मों का अनुष्ठान किया॥5॥   |   ramayan सर्ग 1.14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.14.5 
अभिपूज्य तदा हृष्टा: सर्वे चक्रुर्यथाविधि।
प्रात:सवनपूर्वाणि कर्माणि मुनिपुंगवा:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उन समस्त ऋषियों ने कर्मों के स्वरूप देवताओं का पूजन करके हर्ष में भरकर यथाविधि प्रातःकाल, मध्याह्न और तृतीय सूर्योदय आदि कर्मों का अनुष्ठान किया॥5॥
 
Thereafter, after worshiping the deities who were the embodiment of the deeds, all those sages, filled with joy, performed the morning rituals etc. (i.e. morning, mid-day and third sunrise) as per the rituals. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)