श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  1.14.49 
मणिरत्नं सुवर्णं वा गावो यद्वा समुद्यतम्।
तत् प्रयच्छ नृपश्रेष्ठ धरण्या न प्रयोजनम्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
'नृपश्रेष्ठ! हमें रत्न, मणि, स्वर्ण, गौएँ अथवा जो कुछ भी यहाँ दक्षिणा में उपलब्ध हो, दे दीजिए। इस पृथ्वी से हमें कोई प्रयोजन नहीं है ॥49॥
 
'Nrupashrestha! Give us gems, gems, gold, cows or whatever is present here as Dakshina. We have no use for this earth. 49॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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