श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  1.14.47 
भवानेव महीं कृत्स्नामेको रक्षितुमर्हति।
न भूम्या कार्यमस्माकं नहि शक्ता: स्म पालने॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! इस सम्पूर्ण पृथ्वी की रक्षा करने में आप ही समर्थ हैं। हममें इसकी रक्षा करने की शक्ति नहीं है, इसलिए इस भूमि का हमें कोई उपयोग नहीं है ॥47॥
 
‘Maharaj! You alone are capable of protecting this entire earth. We do not have the power to protect it; therefore we have no use for the land. ॥ 47॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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