Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.14.46: ऐसा दान देकर इक्ष्वाकुकुलनन्दन श्री महाराज दशरथ के आनन्द की सीमा न रही, किन्तु समस्त ऋत्विजों ने उस पापरहित राजा से इस प्रकार कहा-॥46॥ | ramayan सर्ग 1.14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं दत्त्वा प्रहृष्टोऽभूच्छ्रीमानिक्ष्वाकुनन्दन:।
ऋत्विजस्त्वब्रुवन् सर्वे राजानं गतकिल्बिषम्॥ ४६॥
अनुवाद
ऐसा दान देकर इक्ष्वाकुकुलनन्दन श्री महाराज दशरथ के आनन्द की सीमा न रही, किन्तु समस्त ऋत्विजों ने उस पापरहित राजा से इस प्रकार कहा-॥46॥
There was no limit to the joy of Ikshvakukulnandan Sir Maharaj Dasharatha after giving such a donation, but all the Ritvijas spoke to that sinless king like this -॥ 46॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥