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ramayan 1.14.45: इस प्रकार विधिपूर्वक यज्ञ सम्पन्न करके कुल की वृद्धि करने वाले पुरुषोत्तम राजा दशरथ ने ऋत्विजों को सम्पूर्ण पृथ्वी दान कर दी ॥45॥   |   ramayan सर्ग 1.14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  1.14.45 
क्रतुं समाप्य तु तदा न्यायत: पुरुषर्षभ:।
ऋत्विग्भ्यो हि ददौ राजा धरां तां कुलवर्धन:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार विधिपूर्वक यज्ञ सम्पन्न करके कुल की वृद्धि करने वाले पुरुषोत्तम राजा दशरथ ने ऋत्विजों को सम्पूर्ण पृथ्वी दान कर दी ॥45॥
 
In this way, after completing the yajna in a proper manner, King Dasharatha, the man-headed king who had increased his clan, donated the entire earth to the Ritvijas. 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)