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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  1.14.44 
उद्‍गात्रे तु तथोदीचीं दक्षिणैषा विनिर्मिता।
अश्वमेधे महायज्ञे स्वयंभूविहिते पुरा॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार, उद्गा ने उसे उत्तर दिशा की सारी भूमि दे दी। पूर्वकाल में भगवान ब्रह्मा द्वारा सम्पन्न अश्वमेध नामक महान यज्ञ में भी इसी प्रकार की दक्षिणा का विधान किया गया था।
 
In the same way, Udga gave him all the land in the north. In the great sacrifice called Ashwamedha, which was performed by Lord Brahma in the past, a similar dakshina was prescribed as the offering.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)