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ramayan 1.14.43: यज्ञ के पूर्ण होने पर अपने वंश की प्रतिष्ठा बढ़ाने वाले राजा दशरथ ने सारा राज्य दक्षिणा में होता को सौंप दिया, अयोध्या के पूर्व का राज्य अध्वर्यु को और दक्षिण का राज्य ब्रह्मा को दे दिया ॥43॥   |   ramayan सर्ग 1.14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  1.14.43 
प्राचीं होत्रे ददौ राजा दिशं स्वकुलवर्धन:।
अध्वर्यवे प्रतीचीं तु ब्रह्मणे दक्षिणां दिशम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
यज्ञ के पूर्ण होने पर अपने वंश की प्रतिष्ठा बढ़ाने वाले राजा दशरथ ने सारा राज्य दक्षिणा में होता को सौंप दिया, अयोध्या के पूर्व का राज्य अध्वर्यु को और दक्षिण का राज्य ब्रह्मा को दे दिया ॥43॥
 
After the completion of the sacrifice, King Dasharatha, who had increased the prestige of his dynasty, handed over the entire kingdom to Hota as dakshina, the kingdom to the east of Ayodhya, the kingdom to Adhvaryu and the kingdom to the south to Brahma. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)