श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  1.14.39 
प्लक्षशाखासु यज्ञानामन्येषां क्रियते हवि:।
अश्वमेधस्य यज्ञस्य वैतसो भाग इष्यते॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
अश्वमेध के अतिरिक्त अन्य यज्ञों में दी जाने वाली आहुति पाकर वृक्ष की शाखाओं में रखकर दी जाती है; परंतु अश्वमेध यज्ञ की आहुति ईख की चटाई में रखकर देने का नियम है ॥39॥
 
Apart from Ashvamedha, the offerings made in other yagyas are made by keeping them in the branches of Pakar tree; But there is a rule to give the offering of Ashvamedha Yagya by keeping it in a reed mat. 39॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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