श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  1.14.38 
हयस्य यानि चांगानि तानि सर्वाणि ब्राह्मणा:।
अग्नौ प्रास्यन्ति विधिवत् समस्ता: षोडशर्त्विज:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
उस अश्वमेध यज्ञ की समस्त हवि सामग्री लेकर सोलह ऋत्विज ब्राह्मण विधिपूर्वक अग्नि में उन्हें आहुति देने लगे॥38॥
 
Taking all the sacrificial items that were part of that Ashwamedha Yagya, all the sixteen Ritvij Brahmins started offering them in the fire as per the rituals. 38॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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