श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.14.31 
शामित्रे तु हयस्तत्र तथा जलचराश्च ये।
ऋषिभि: सर्वमेवैतन्नियुक्तं शास्त्रतस्तदा॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
शमित्र कर्म में जो यज्ञ के घोड़े और कूर्म आदि जलचर जन्तु वहाँ लाए गए थे, उन सबको ऋषियों ने शास्त्रानुसार पूर्वोक्त गांठों में बांध दिया ॥31॥
 
In Shamitra Karma, the sacrificial horses and aquatic animals like Kurma etc. which were brought there, the sages tied them all in the aforesaid knots as per the scriptures. 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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