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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान
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श्लोक 30
श्लोक
1.14.30
नियुक्तास्तत्र पशवस्तत्तदुद्दिश्य दैवतम्।
उरगा: पक्षिणश्चैव यथाशास्त्रं प्रचोदिता:॥ ३०॥
अनुवाद
वहाँ पूर्वोक्त यूपों में शास्त्रविहित पशु, सर्प और पक्षी विविध देवताओं के प्रयोजन से बाँधे जाते थे ॥30॥
There, in the aforesaid Yupas, the animals, snakes and birds prescribed in the scriptures were tied for the purpose of various deities. 30॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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