श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.14.28 
इष्टकाश्च यथान्यायं कारिताश्च प्रमाणत:।
चितोऽग्निर्ब्राह्मणैस्तत्र कुशलै: शिल्पकर्मणि॥ २८॥
 
 
अनुवाद
सूत्रग्रन्थों में दिए गए निर्देशानुसार सही माप की ईंटें तैयार की गईं। यज्ञ-शिल्प में निपुण ब्राह्मणों ने उन ईंटों से अग्नि प्रज्वलित की थी॥ 28॥
 
Bricks were prepared in the correct measurement as per the instructions given in the Sutra Granthas. The Brahmins skilled in the craftsmanship of the Yagya had used those bricks to light the fire.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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