श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.14.26 
विन्यस्ता विधिवत् सर्वे शिल्पिभि: सुकृता दृढा:।
अष्टास्रय: सर्व एव श्लक्ष्णरूपसमन्विता:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
कारीगरों द्वारा अच्छी तरह बनाए गए वे सभी सुदृढ़ यूप विधिपूर्वक स्थापित किए गए थे। वे सभी आठ कोणों से सुशोभित थे। उनका आकार सुंदर और चिकना था॥ 26॥
 
All those strong yupas, well made by the artisans, were duly installed. All of them were decorated with eight angles. Their shape was beautiful and smooth.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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