श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.14.25 
एकविंशतियूपास्ते एकविंशत्यरत्नय:।
वासोभिरेकविंशद्भिरेकैकं समलंकृता:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
उपर्युक्त इक्कीस यूप इक्कीस अरत्नी* (पाँच सौ चार इंच) ऊँचे बनाए गए। उन सबको अलग-अलग इक्कीस वस्त्रों से सजाया गया॥25॥
 
The aforesaid twenty-one yupas were made twenty-one aratnis* (five hundred and four inches) high. All of them were decorated with twenty-one clothes separately.॥25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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