श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.14.22 
प्राप्ते यूपोच्छ्रये तस्मिन् षड् बैल्वा: खादिरास्तथा।
तावन्तो बिल्वसहिता: पर्णिनश्च तथा परे॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जब यूपों को स्थापित करने का समय आया, तो बेल की लकड़ी से बने छह यूप स्थापित किए गए। खैर की लकड़ी से बने यूप भी उतने ही स्थापित किए गए और बेल की लकड़ी से बने यूपों के साथ-साथ पलाश के यूप भी उतने ही स्थापित किए गए।
 
When the time came to erect the yupas, six yupas made of bael wood were planted. The same number of yupas made of Khair wood were also erected and the same number of yupas made of Palaash were also erected alongside the yupas made of bael wood.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas