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ramayan 1.14.21: राजा के यज्ञ में ऐसा कोई सदस्य नहीं था जो व्याकरण के छह अंगों का ज्ञाता न हो, जिसने ब्रह्मचर्य व्रत का पालन न किया हो और जो पढ़ा-लिखा न हो। वहाँ ऐसा कोई ब्राह्मण नहीं था जो वाद-विवाद और चर्चा में कुशल न हो।   |   ramayan सर्ग 1.14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.14.21 
नाषडंगविदत्रासीन्नाव्रतो नाबहुश्रुत:।
सदस्यास्तस्य वै राज्ञो नावादकुशलो द्विज:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
राजा के यज्ञ में ऐसा कोई सदस्य नहीं था जो व्याकरण के छह अंगों का ज्ञाता न हो, जिसने ब्रह्मचर्य व्रत का पालन न किया हो और जो पढ़ा-लिखा न हो। वहाँ ऐसा कोई ब्राह्मण नहीं था जो वाद-विवाद और चर्चा में कुशल न हो।
 
There was no member in the king's yajna who was not knowledgeable about the six parts of grammar, who had not observed the vow of celibacy and who was not well-read. There was no Brahmin there who was not skilled in debate and discussion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)