श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.14.2 
ऋष्यशृंगं पुरस्कृत्य कर्म चक्रुर्द्विजर्षभा:।
अश्वमेधे महायज्ञे राज्ञोऽस्य सुमहात्मन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
महामनस्वी राजा दशरथ के अश्वमेध नामक महान यज्ञ में श्रेष्ठ ब्राह्मण ऋष्य श्रृंग को आगे रखकर यज्ञ संबंधी कार्य करने लगे। 2॥
 
In the great yagya named Ashwamedha of Mahamanasvi King Dashrath, the best brahmins started performing the yagya related activities by putting Rishya Shringa forward. 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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