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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.14.19 
कर्मान्तरे तदा विप्रा हेतुवादान् बहूनपि।
प्राहु: सुवाग्मिनो धीरा: परस्परजिगीषया॥ १९॥
 
 
अनुवाद
एक सावन के समाप्त होने के बाद और दूसरे सावन के आरम्भ होने से पहले जो अवकाश मिलता था, उसमें श्रेष्ठ वक्ता और धैर्यवान ब्राह्मण एक-दूसरे को परास्त करने की इच्छा से अनेक तर्क प्रस्तुत करते हुए एक-दूसरे से वाद-विवाद करते थे॥19॥
 
In the leisure time available after the end of one Savan and before the beginning of the next, the excellent orators and patient Brahmins used to debate each other presenting many arguments with the desire to defeat each other.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)