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ramayan 1.14.18: वस्त्र और आभूषणों से सुसज्जित पुरुष ब्राह्मणों को भोजन कराते थे और उनकी सहायता करने वाले अन्य लोग भी शुद्ध रत्नजटित कुण्डल धारण करते थे॥18॥   |   ramayan सर्ग 1.14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.14.18 
स्वलंकृताश्च पुरुषा ब्राह्मणान् पर्यवेषयन्।
उपासन्ते च तानन्ये सुमृष्टमणिकुण्डला:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वस्त्र और आभूषणों से सुसज्जित पुरुष ब्राह्मणों को भोजन कराते थे और उनकी सहायता करने वाले अन्य लोग भी शुद्ध रत्नजटित कुण्डल धारण करते थे॥18॥
 
Men adorned with clothes and ornaments served food to the brahmins, and the others who helped them also wore pure jeweled earrings.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)