श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.14.16 
नानादेशादनुप्राप्ता: पुरुषा: स्त्रीगणास्तथा।
अन्नपानै: सुविहितास्तस्मिन् यज्ञे महात्मन:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
महामनस्वी राजा दशरथ के उस यज्ञ में नाना देशों से आये हुए स्त्री-पुरुष भोजन-पान से तृप्त हो गये॥16॥
 
In that yajna of the great-minded king Dasharatha, men and women who had come from different countries were well satisfied with food and drink. 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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