श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.14.13 
वृद्धाश्च व्याधिताश्चैव स्त्रीबालाश्च तथैव च।
अनिशं भुञ्जमानानां न तृप्तिरुपलभ्यते॥ १३॥
 
 
अनुवाद
बूढ़े, रोगी, स्त्रियाँ और बालक भी तृप्त हो जाते थे। भोजन इतना स्वादिष्ट होता था कि निरन्तर खाने पर भी किसी का पेट नहीं भरता था॥13॥
 
The old, the sick, women and children also got enough food. The food was so delicious that no one would get enough of it even after eating continuously.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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