Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.14.10: उस यज्ञ में कोई भी अनुचित या अनुचित आहुति नहीं थी। कहीं कोई त्रुटि नहीं थी - अनजाने में भी कोई कार्य छूटा नहीं था; क्योंकि वहाँ सभी कार्य मंत्रोच्चार से ही पूरे होते प्रतीत होते थे। महर्षियों ने शांतिपूर्वक और बिना किसी विघ्न के सभी कार्य संपन्न किए॥10॥ | ramayan सर्ग 1.14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न चाहुतमभूत् तत्र स्खलितं वा न किंचन।
दृश्यते ब्रह्मवत् सर्वं क्षेमयुक्तं हि चक्रिरे॥ १०॥
अनुवाद
उस यज्ञ में कोई भी अनुचित या अनुचित आहुति नहीं थी। कहीं कोई त्रुटि नहीं थी - अनजाने में भी कोई कार्य छूटा नहीं था; क्योंकि वहाँ सभी कार्य मंत्रोच्चार से ही पूरे होते प्रतीत होते थे। महर्षियों ने शांतिपूर्वक और बिना किसी विघ्न के सभी कार्य संपन्न किए॥10॥
There was no unsuitable or wrong offering in that yajna. There was no mistake anywhere - no act was left out even unknowingly; because all the acts there appeared to be completed with the chanting of mantras. The great sages completed all the acts with peace and without any obstacles.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥