Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 1.13.40-41: तत्पश्चात् वशिष्ठ आदि श्रेष्ठ द्विजों ने यज्ञमंडप में जाकर ऋष्यश्रृंग को आगे करके शास्त्रानुसार यज्ञकर्म आरम्भ किया। श्री अवधनरेश ने अपनी पत्नियों सहित यज्ञ की दीक्षा ली ॥40-41॥   |   ramayan सर्ग 1.13: यज्ञ की तैयारी, राजाओं को बुलाने के आदेश एवं उनका सत्कार तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 13: यज्ञ की तैयारी, राजाओं को बुलाने के आदेश एवं उनका सत्कार तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना  »  श्लोक 40-41
 
 
श्लोक  1.13.40-41 
ततो वसिष्ठप्रमुखा: सर्व एव द्विजोत्तमा:।
ऋष्यशृंगं पुरस्कृत्य यज्ञकर्मारभंस्तदा॥ ४०॥
यज्ञवाटं गता: सर्वे यथाशास्त्रं यथाविधि।
श्रीमांश्च सह पत्नीभी राजा दीक्षामुपाविशत्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वशिष्ठ आदि श्रेष्ठ द्विजों ने यज्ञमंडप में जाकर ऋष्यश्रृंग को आगे करके शास्त्रानुसार यज्ञकर्म आरम्भ किया। श्री अवधनरेश ने अपनी पत्नियों सहित यज्ञ की दीक्षा ली ॥40-41॥
 
After that, all the best Dwijas like Vashishtha went to the Yagya Mandap and started the Yagya Karma as per the scriptures by placing the Rishya Shringa forward. Shri Avadhanresh along with his wives took the initiation of Yagya. 40-41॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे त्रयोदश: सर्ग:॥ १३॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें तेरहवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ १३॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)