Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.13.4: 'तुम मुझ पर विशेष स्नेह रखते हो, मेरे मित्र हो, मेरे हितैषी हो, मेरे गुरु हो और सबसे महान हो। इस त्याग का भार जो तुम पर आया है, उसे केवल तुम ही सहन कर सकते हो।'॥4॥ | ramayan सर्ग 1.13: यज्ञ की तैयारी, राजाओं को बुलाने के आदेश एवं उनका सत्कार तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'तुम मुझ पर विशेष स्नेह रखते हो, मेरे मित्र हो, मेरे हितैषी हो, मेरे गुरु हो और सबसे महान हो। इस त्याग का भार जो तुम पर आया है, उसे केवल तुम ही सहन कर सकते हो।'॥4॥
‘You have special affection for me, you are my friend, my well-wisher, my Guru and the greatest. Only you can bear the burden of this sacrifice that has come upon you.'॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥