Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 1.13.38: राजेन्द्र! यज्ञमण्डप में सभी मनोवांछित वस्तुएँ सजा दी गई हैं। तुम स्वयं जाकर देखो। यह मण्डप इतनी शीघ्रता से तैयार किया गया है, मानो मन के संकल्प मात्र से ही बना हो॥ 38॥   |   ramayan सर्ग 1.13: यज्ञ की तैयारी, राजाओं को बुलाने के आदेश एवं उनका सत्कार तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 13: यज्ञ की तैयारी, राजाओं को बुलाने के आदेश एवं उनका सत्कार तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  1.13.38 
सर्वकामैरुपहृतैरुपेतं वै समन्तत:।
द्रष्टुमर्हसि राजेन्द्र मनसेव विनिर्मितम्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! यज्ञमण्डप में सभी मनोवांछित वस्तुएँ सजा दी गई हैं। तुम स्वयं जाकर देखो। यह मण्डप इतनी शीघ्रता से तैयार किया गया है, मानो मन के संकल्प मात्र से ही बना हो॥ 38॥
 
‘Rajendra! All the desirable things have been arranged in the yajna mandap. You should go and see for yourself. This mandap has been prepared so quickly, as if it was made by a mere thought of the mind.'॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)