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ramayan 1.13.37: हमारे कार्यकर्ताओं ने पूर्णतः सतर्क होकर यज्ञ की सारी तैयारियाँ कर ली हैं। अब तुम भी यज्ञ करने के लिए यज्ञ मण्डप के पास आओ॥37॥   |   ramayan सर्ग 1.13: यज्ञ की तैयारी, राजाओं को बुलाने के आदेश एवं उनका सत्कार तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 13: यज्ञ की तैयारी, राजाओं को बुलाने के आदेश एवं उनका सत्कार तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.13.37 
यज्ञियं च कृतं सर्वं पुरुषै: सुसमाहितै:।
निर्यातु च भवान् यष्टुं यज्ञायतनमन्तिकात्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
हमारे कार्यकर्ताओं ने पूर्णतः सतर्क होकर यज्ञ की सारी तैयारियाँ कर ली हैं। अब तुम भी यज्ञ करने के लिए यज्ञ मण्डप के पास आओ॥37॥
 
'Our workers have made all the preparations for the yajna being fully alert. Now you too come near the yajna mandap to perform the yajna.॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)