Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.13.3: 'ब्रह्मन्! मुनिप्रवर! आप मेरा यज्ञ शास्त्रविधि से करें और ऐसा उपाय करें कि ब्रह्मराक्षस आदि यज्ञ के अंग अश्व-संचरण आदि में विघ्न न डाल सकें।'॥3॥ | ramayan सर्ग 1.13: यज्ञ की तैयारी, राजाओं को बुलाने के आदेश एवं उनका सत्कार तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यज्ञो मे क्रियतां ब्रह्मन् यथोक्तं मुनिपुंगव।
यथा न विघ्ना: क्रियन्ते यज्ञांगेषु विधीयताम्॥ ३॥
अनुवाद
'ब्रह्मन्! मुनिप्रवर! आप मेरा यज्ञ शास्त्रविधि से करें और ऐसा उपाय करें कि ब्रह्मराक्षस आदि यज्ञ के अंग अश्व-संचरण आदि में विघ्न न डाल सकें।'॥3॥
'Brahman! Munipravar! You should perform my Yagya according to the scriptures and take measures so that Brahmarakshasas etc. cannot interfere with the horse-transmission etc. which are part of the Yagya. 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥