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ramayan 1.13.28-29: दक्षिण भारत के समस्त राजाओं को भी आमंत्रित करो। इस पृथ्वी पर जो भी अन्य राजा महाराजाओं के प्रति स्नेह रखते हैं, उन्हें उनके सेवकों और सम्बन्धियों सहित यथाशीघ्र बुलाओ। महाराज की आज्ञा से उन सभी को भाग्यशाली दूतों द्वारा निमंत्रण भेजो।॥28-29॥   |   ramayan सर्ग 1.13: यज्ञ की तैयारी, राजाओं को बुलाने के आदेश एवं उनका सत्कार तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 13: यज्ञ की तैयारी, राजाओं को बुलाने के आदेश एवं उनका सत्कार तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना  »  श्लोक 28-29
 
 
श्लोक  1.13.28-29 
दाक्षिणात्यान् नरेन्द्रांश्च समस्तानानयस्व ह।
सन्ति स्निग्धाश्च ये चान्ये राजान: पृथिवीतले॥ २८॥
तानानय यथा क्षिप्रं सानुगान् सहबान्धवान्।
एतान् दूतैर्महाभागैरानयस्व नृपाज्ञया॥ २९॥
 
 
अनुवाद
दक्षिण भारत के समस्त राजाओं को भी आमंत्रित करो। इस पृथ्वी पर जो भी अन्य राजा महाराजाओं के प्रति स्नेह रखते हैं, उन्हें उनके सेवकों और सम्बन्धियों सहित यथाशीघ्र बुलाओ। महाराज की आज्ञा से उन सभी को भाग्यशाली दूतों द्वारा निमंत्रण भेजो।॥28-29॥
 
‘Invite all the kings of South India as well. Call all the other kings on this earth who are affectionate towards the Maharaja, along with their servants and relatives, as soon as possible. With the order of the Maharaja, send invitations to all of them through fortunate messengers.’॥ 28-29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)