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ramayan 1.13.25: 'अंगदेश के स्वामी महान धनुर्धर राजा रोमपाद हमारे महाराज के मित्र हैं, अतः उन्हें उनके पुत्र सहित आदरपूर्वक यहाँ ले आओ॥ 25॥   |   ramayan सर्ग 1.13: यज्ञ की तैयारी, राजाओं को बुलाने के आदेश एवं उनका सत्कार तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 13: यज्ञ की तैयारी, राजाओं को बुलाने के आदेश एवं उनका सत्कार तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.13.25 
अंगेश्वरं महेष्वासं रोमपादं सुसत्कृतम्।
वयस्यं राजसिंहस्य सपुत्रं तमिहानय॥ २५॥
 
 
अनुवाद
'अंगदेश के स्वामी महान धनुर्धर राजा रोमपाद हमारे महाराज के मित्र हैं, अतः उन्हें उनके पुत्र सहित आदरपूर्वक यहाँ ले आओ॥ 25॥
 
'The great archer King Romapada, the lord of Angadesh, is a friend of our Maharaja, so bring him here with respect along with his son.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)