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ramayan 1.13.2: राजा ने वशिष्ठजी को प्रणाम करके आदरपूर्वक उनकी पूजा की और पुत्र प्राप्ति के उद्देश्य से संसार के श्रेष्ठ मुनि से यह विनम्र बात कही॥2॥   |   ramayan सर्ग 1.13: यज्ञ की तैयारी, राजाओं को बुलाने के आदेश एवं उनका सत्कार तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 13: यज्ञ की तैयारी, राजाओं को बुलाने के आदेश एवं उनका सत्कार तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.13.2 
अभिवाद्य वसिष्ठं च न्यायत: प्रतिपूज्य च।
अब्रवीत् प्रश्रितं वाक्यं प्रसवार्थं द्विजोत्तमम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
राजा ने वशिष्ठजी को प्रणाम करके आदरपूर्वक उनकी पूजा की और पुत्र प्राप्ति के उद्देश्य से संसार के श्रेष्ठ मुनि से यह विनम्र बात कही॥2॥
 
After paying obeisance to Vashishthaji, the king worshiped him with due respect and with the aim of getting a son, he said this polite thing to the best sage of the world. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)