Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.13.19-20: तत्पश्चात् वशिष्ठजी ने सुमन्त्र को बुलाकर कहा - 'इस पृथ्वी के समस्त धर्मात्मा राजाओं, ब्राह्मणों, क्षत्रियों, वैश्यों और सहस्रों शूद्रों को इस यज्ञ में आने के लिए आमंत्रित करो॥20॥ | ramayan सर्ग 1.13: यज्ञ की तैयारी, राजाओं को बुलाने के आदेश एवं उनका सत्कार तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: सुमन्त्रमाहूय वसिष्ठो वाक्यमब्रवीत्॥ १९॥
निमन्त्रयस्व नृपतीन् पृथिव्यां ये च धार्मिका:।
ब्राह्मणान् क्षत्रियान् वैश्यान् शूद्रांश्चैव सहस्रश:॥ २०॥
अनुवाद
तत्पश्चात् वशिष्ठजी ने सुमन्त्र को बुलाकर कहा - 'इस पृथ्वी के समस्त धर्मात्मा राजाओं, ब्राह्मणों, क्षत्रियों, वैश्यों और सहस्रों शूद्रों को इस यज्ञ में आने के लिए आमंत्रित करो॥20॥
Thereafter, Vashishthaji called Sumantra and said - 'Invite all the righteous kings, Brahmins, Kshatriyas, Vaishyas and thousands of Shudras on this earth to come to this yagya. 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥