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ramayan 1.13.16-17: 'जिन सेवकों और कारीगरों को धन-धान्य आदि से सम्मानित किया जाता है, वे सभी परिश्रमपूर्वक काम करते हैं। उनके द्वारा किया गया सारा काम सुन्दरता से संपन्न होता है। उनका कोई भी काम बिगड़ता नहीं; इसलिए आप सभी भी प्रसन्न मन से ऐसा ही करें।'   |   ramayan सर्ग 1.13: यज्ञ की तैयारी, राजाओं को बुलाने के आदेश एवं उनका सत्कार तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 13: यज्ञ की तैयारी, राजाओं को बुलाने के आदेश एवं उनका सत्कार तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  1.13.16-17 
ये स्यु: सम्पूजिता: सर्वे वसुभिर्भोजनेन च॥ १६॥
यथा सर्वं सुविहितं न किंचित् परिहीयते।
तथा भवन्त: कुर्वन्तु प्रीतियुक्तेन चेतसा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'जिन सेवकों और कारीगरों को धन-धान्य आदि से सम्मानित किया जाता है, वे सभी परिश्रमपूर्वक काम करते हैं। उनके द्वारा किया गया सारा काम सुन्दरता से संपन्न होता है। उनका कोई भी काम बिगड़ता नहीं; इसलिए आप सभी भी प्रसन्न मन से ऐसा ही करें।'
 
‘The servants and artisans who are honoured with money and food etc., all work diligently. All the work done by them is completed beautifully. None of their work goes wrong; therefore all of you should do the same with a happy mind.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)