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ramayan 1.13.15-16h: ‘यज्ञ की आवश्यक तैयारी में जो कारीगर लगे हैं, उनका विशेष आदर करना चाहिए, छोटे-बड़े सबका ध्यान रखना चाहिए।॥ 15 1/2॥   |   ramayan सर्ग 1.13: यज्ञ की तैयारी, राजाओं को बुलाने के आदेश एवं उनका सत्कार तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 13: यज्ञ की तैयारी, राजाओं को बुलाने के आदेश एवं उनका सत्कार तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  1.13.15-16h 
यज्ञकर्मसु ये व्यग्रा: पुरुषा: शिल्पिनस्तथा॥ १५॥
तेषामपि विशेषेण पूजा कार्या यथाक्रमम्।
 
 
अनुवाद
‘यज्ञ की आवश्यक तैयारी में जो कारीगर लगे हैं, उनका विशेष आदर करना चाहिए, छोटे-बड़े सबका ध्यान रखना चाहिए।॥ 15 1/2॥
 
‘The artisans who are involved in the necessary preparations for the yajna should be respected in a special way, keeping in mind the young and the old.॥ 15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)