Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 1.13.14-15h: ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि सभी जातियों के लोगों का आदर हो और उन्हें सम्मान मिले। काम या क्रोध के वशीभूत होकर भी किसी का अनादर नहीं करना चाहिए।   |   ramayan सर्ग 1.13: यज्ञ की तैयारी, राजाओं को बुलाने के आदेश एवं उनका सत्कार तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 13: यज्ञ की तैयारी, राजाओं को बुलाने के आदेश एवं उनका सत्कार तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  1.13.14-15h 
सर्वे वर्णा यथा पूजां प्राप्नुवन्ति सुसत्कृता:॥ १४॥
न चावज्ञा प्रयोक्तव्या कामक्रोधवशादपि।
 
 
अनुवाद
ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि सभी जातियों के लोगों का आदर हो और उन्हें सम्मान मिले। काम या क्रोध के वशीभूत होकर भी किसी का अनादर नहीं करना चाहिए।
 
‘There should be such a system in place that people of all castes are well-respected and receive respect. One should not disrespect anyone even under the influence of lust or anger.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)