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ramayan 1.12.8-9h: 'महर्षिओ! मैं अपने पुत्र के लिए सदैव व्यथित रहता हूँ। उसके बिना मुझे इस राज्य आदि से भी सुख नहीं मिलता। अतः मैंने अपने पुत्र के लिए अश्वमेध यज्ञ करने का निश्चय किया है।'   |   ramayan सर्ग 1.12: ऋषियों का दशरथ को और दशरथ का मन्त्रियों को यज्ञ की आवश्यक तैयारी करने के लिये आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 12: ऋषियों का दशरथ को और दशरथ का मन्त्रियों को यज्ञ की आवश्यक तैयारी करने के लिये आदेश देना  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  1.12.8-9h 
मम तातप्यमानस्य पुत्रार्थं नास्ति वै सुखम्॥ ८॥
पुत्रार्थं हयमेधेन यक्ष्यामीति मतिर्मम।
 
 
अनुवाद
'महर्षिओ! मैं अपने पुत्र के लिए सदैव व्यथित रहता हूँ। उसके बिना मुझे इस राज्य आदि से भी सुख नहीं मिलता। अतः मैंने अपने पुत्र के लिए अश्वमेध यज्ञ करने का निश्चय किया है।'
 
‘Maharishis! I am always distressed for my son. Without him, I do not get happiness even from this kingdom etc. Therefore, I have decided to perform Ashwamedha Yagna for my son. 8 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)