Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.12.3-4h: ऋष्यश्रृंग ने 'बहुत अच्छा' कहकर उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली और पृथ्वी के राजा से कहा - 'हे राजन! यज्ञ की सामग्री एकत्रित करवाइए। आपके यज्ञ के घोड़े को विश्वभर में भ्रमण के लिए छोड़ दिया जाए और सरयू के उत्तरी तट पर एक यज्ञभूमि का निर्माण करवाया जाए।' | ramayan सर्ग 1.12: ऋषियों का दशरथ को और दशरथ का मन्त्रियों को यज्ञ की आवश्यक तैयारी करने के लिये आदेश देना । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथेति च स राजानमुवाच वसुधाधिपम्।
सम्भारा: सम्भ्रियन्तां ते तुरगश्च विमुच्यताम्॥ ३॥
सरय्वाश्चोत्तरे तीरे यज्ञभूमिर्विधीयताम्।
अनुवाद
ऋष्यश्रृंग ने 'बहुत अच्छा' कहकर उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली और पृथ्वी के राजा से कहा - 'हे राजन! यज्ञ की सामग्री एकत्रित करवाइए। आपके यज्ञ के घोड़े को विश्वभर में भ्रमण के लिए छोड़ दिया जाए और सरयू के उत्तरी तट पर एक यज्ञभूमि का निर्माण करवाया जाए।'
Rishyashringa accepted his request by saying 'very good' and said to the King of the earth - 'O King! Get the materials for the yagya collected. Your yagya horse should be released to travel around the world and a yagya ground should be constructed on the northern bank of the Sarayu.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥