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ramayan 1.12.17: 'यदि इस महायज्ञ में दुःखदायी पाप होने का भय न हो, तो सभी राजा इसे कर सकते हैं ॥17॥   |   ramayan सर्ग 1.12: ऋषियों का दशरथ को और दशरथ का मन्त्रियों को यज्ञ की आवश्यक तैयारी करने के लिये आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 12: ऋषियों का दशरथ को और दशरथ का मन्त्रियों को यज्ञ की आवश्यक तैयारी करने के लिये आदेश देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.12.17 
शक्य: कर्तुमयं यज्ञ: सर्वेणापि महीक्षिता।
नापराधो भवेत् कष्टो यद्यस्मिन् क्रतुसत्तमे॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'यदि इस महायज्ञ में दुःखदायी पाप होने का भय न हो, तो सभी राजा इसे कर सकते हैं ॥17॥
 
'If there is no fear of becoming a painful crime in this great sacrifice, then all the kings can perform it. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)