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ramayan 1.12.16: 'नदी के उत्तर तट पर यज्ञभूमि का निर्माण करना चाहिए, शास्त्रानुसार शांतिकर्म, पुण्याहवाचन आदि अनुष्ठान विस्तारपूर्वक करने चाहिए, जिससे विघ्नों का निवारण हो सके। 16॥   |   ramayan सर्ग 1.12: ऋषियों का दशरथ को और दशरथ का मन्त्रियों को यज्ञ की आवश्यक तैयारी करने के लिये आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 12: ऋषियों का दशरथ को और दशरथ का मन्त्रियों को यज्ञ की आवश्यक तैयारी करने के लिये आदेश देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.12.16 
सरय्वाश्चोत्तरे तीरे यज्ञभूमिर्विधीयताम्।
शान्तयश्चाभिवर्धन्तां यथाकल्पं यथाविधि॥ १६॥
 
 
अनुवाद
'नदी के उत्तर तट पर यज्ञभूमि का निर्माण करना चाहिए, शास्त्रानुसार शांतिकर्म, पुण्याहवाचन आदि अनुष्ठान विस्तारपूर्वक करने चाहिए, जिससे विघ्नों का निवारण हो सके। 16॥
 
'A yagya bhoomi should be constructed on the north bank of the river, as per the scriptures, rituals like Shanti Karma, Punyahvachan etc. should be performed in detail, so that the obstacles can be eliminated. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)