श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 11: राजा दशरथ का सपरिवार अंगराज के यहाँ जाकर वहाँ से शान्ता और ऋष्यश्रृंग को अपने घर ले आना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.11.7 
प्रतिगृह्य च तं विप्रं स राजा विगतज्वर:।
आहरिष्यति तं यज्ञं प्रहृष्टेनान्तरात्मना॥ ७॥
 
 
अनुवाद
"ब्राह्मण ऋष्यश्रृंग को पाकर राजा दशरथ की सारी चिंताएँ दूर हो जाएँगी और वे प्रसन्न होकर उस यज्ञ को सम्पन्न करेंगे।" 7॥
 
"After getting the Brahmin Rishyashringa, all the worries of King Dasharatha will go away and he will be happy and will perform that yagya." 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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