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ramayan 1.11.15-16h: वहाँ पहुँचकर उन्होंने रोमपाद के पास बैठे हुए महर्षि ऋष्यश्रृंग को देखा। वे ऋषिगण प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी प्रतीत हो रहे थे। 15 1/2॥   |   ramayan सर्ग 1.11: राजा दशरथ का सपरिवार अंगराज के यहाँ जाकर वहाँ से शान्ता और ऋष्यश्रृंग को अपने घर ले आना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 11: राजा दशरथ का सपरिवार अंगराज के यहाँ जाकर वहाँ से शान्ता और ऋष्यश्रृंग को अपने घर ले आना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  1.11.15-16h 
आसाद्य तं द्विजश्रेष्ठं रोमपादसमीपगम्॥ १५॥
ऋषिपुत्रं ददर्शाथो दीप्यमानमिवानलम्।
 
 
अनुवाद
वहाँ पहुँचकर उन्होंने रोमपाद के पास बैठे हुए महर्षि ऋष्यश्रृंग को देखा। वे ऋषिगण प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी प्रतीत हो रहे थे। 15 1/2॥
 
On reaching there, they saw the great sage Rishyashringa sitting near Romapada. Those sages looked as bright as blazing fire. 15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)