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ramayan 1.11.14-15h: रास्ते में अनेक वनों और नदियों को पार करते हुए वे धीरे-धीरे उस भूमि पर पहुँचे जहाँ ऋषि ऋष्यश्रृंग निवास करते थे।   |   ramayan सर्ग 1.11: राजा दशरथ का सपरिवार अंगराज के यहाँ जाकर वहाँ से शान्ता और ऋष्यश्रृंग को अपने घर ले आना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 11: राजा दशरथ का सपरिवार अंगराज के यहाँ जाकर वहाँ से शान्ता और ऋष्यश्रृंग को अपने घर ले आना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  1.11.14-15h 
वनानि सरितश्चैव व्यतिक्रम्य शनै: शनै:॥ १४॥
अभिचक्राम तं देशं यत्र वै मुनिपुंगव:।
 
 
अनुवाद
रास्ते में अनेक वनों और नदियों को पार करते हुए वे धीरे-धीरे उस भूमि पर पहुँचे जहाँ ऋषि ऋष्यश्रृंग निवास करते थे।
 
Crossing numerous forests and rivers on the way, they gradually reached the land where the sage Rishyashringa was residing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)