Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.10.8: "मुनिकुमार ऋष्यश्रृंग अत्यंत शांत स्वभाव के थे। वे सदैव आश्रम में ही रहते थे। उन्हें अपने पिता के पास रहने में सदैव अधिक सुख मिलता था। इसलिए वे आश्रम से बाहर कभी नहीं जाते थे।" | ramayan सर्ग 1.10: अंगदेश में ऋष्यश्रृंग के आने तथा शान्ता के साथ विवाह होने के प्रसंग का विस्तार के साथ वर्णन । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ऋषे: पुत्रस्य धीरस्य नित्यमाश्रमवासिन:।
पितु: स नित्यसंतुष्टो नातिचक्राम चाश्रमात्॥ ८॥
अनुवाद
"मुनिकुमार ऋष्यश्रृंग अत्यंत शांत स्वभाव के थे। वे सदैव आश्रम में ही रहते थे। उन्हें अपने पिता के पास रहने में सदैव अधिक सुख मिलता था। इसलिए वे आश्रम से बाहर कभी नहीं जाते थे।"
“Munikumar Rishyashringa was of a very calm nature. He always used to stay in the ashram. He always found more happiness in staying near his father. Hence, he never used to go out of the ashram.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥