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ramayan 1.10.25-26: ब्राह्मण ऋष्यश्रृंग को आते देख उन वेश्याओं के हृदय हर्ष से खिल उठे। वे सब उनके पास गईं और उनसे इस प्रकार कहने लगीं - 'सौम्य! आओ, आज हमारे आश्रम में आओ।'   |   ramayan सर्ग 1.10: अंगदेश में ऋष्यश्रृंग के आने तथा शान्ता के साथ विवाह होने के प्रसंग का विस्तार के साथ वर्णन   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.10.25-26 
दृष्ट्वैव च ततो विप्रमायान्तं हृष्टमानसा:॥ २५॥
उपसृत्य तत: सर्वास्तास्तमूचुरिदं वच:।
एह्याश्रमपदं सौम्य अस्माकमिति चाब्रुवन्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण ऋष्यश्रृंग को आते देख उन वेश्याओं के हृदय हर्ष से खिल उठे। वे सब उनके पास गईं और उनसे इस प्रकार कहने लगीं - 'सौम्य! आओ, आज हमारे आश्रम में आओ।'
 
Seeing the Brahmin Rishyashringa coming, the hearts of those prostitutes blossomed with joy. All of them went to him and started saying to him like this - 'Soumya! Come, come to our ashram today.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)