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ramayan 1.10.17: वहां पहुंचकर ऋषि पुत्र ने विधिपूर्वक उनकी पूजा की और कहा, 'यह नैवेद्य है, यह जल है और ये खाने के लिए मूल-मूल और फल हैं।'   |   ramayan सर्ग 1.10: अंगदेश में ऋष्यश्रृंग के आने तथा शान्ता के साथ विवाह होने के प्रसंग का विस्तार के साथ वर्णन   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.10.17 
गतानां तु तत: पूजामृषिपुत्रश्चकार ह।
इदमर्घ्यमिदं पाद्यमिदं मूलं फलं च न:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वहां पहुंचकर ऋषि पुत्र ने विधिपूर्वक उनकी पूजा की और कहा, 'यह नैवेद्य है, यह जल है और ये खाने के लिए मूल-मूल और फल हैं।'
 
"On reaching there the sage's son worshipped them in a proper manner, saying, 'This is offering, this is water and these are roots and fruits for food.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)